जिंदगी है ये,
जीना चाहिए जिंदगी की तरह,
जीना चाहिए जिंदगी की तरह,
पर शायद है कुछ जहर-सा,
पी रहे हैं, जाने किस तरह!
कहना तो ये भी चाहते हैं बहुत कुछ,
पर चुप रह जाते हैं किसी असहाय प्राणी की तरह,,
सोचते हैं कि अगर यही जिंदगी है तो जी लेंगे,
जहर है तो क्या हुआ पी लेंगे!



